संविधान के अनुच्छेद 14 15 21 और 21A को ज़मीन पर उतार रहा है आरुग

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही बिलासपुर के स्कूलों में लागू हुआ मासिक धर्म शिक्षा का मॉडल


बिलासपुर। 30 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मासिक धर्म स्वास्थ्य को संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन और गरिमा का अधिकार का हिस्सा घोषित किए जाने से पहले ही बिलासपुर जिले में प्रोजेक्ट ‘आरुग’ इस अधिकार को व्यवहार में लागू कर चुका था। यह पहल प्रोजेक्ट आरुग की संस्थापक-बहन विनीता पटेल और उनके भाई प्रकाश पटेल द्वारा शुरू की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य मासिक धर्म को केवल “महिलाओं का विषय” न मानकर उसे लैंगिक समानता, शिक्षा और गरिमा का संवैधानिक प्रश्न बनाना है।


बस्ता एजुकेशन एंड हेल्प फाउंडेशन के अंतर्गत संचालित इस पहल के तहत हाल ही में बिलासपुर जिले के कई शासकीय एवं SAGES स्कूलों में लड़कियों और लड़कों—दोनों को एक साथ मासिक धर्म पर वैज्ञानिक व संवेदनशील शिक्षा दी गई। इस दौरान लड़कों को भी सैनिटरी पैड वितरित किए गए ताकि वे समाज में एक सहयोगी भूमिका निभा सकें। यह पहल सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15(3) (महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान) और अनुच्छेद 21A (शिक्षा का मौलिक अधिकार) की भावना को ज़मीन पर साकार करती है।


इन स्कूलों में आयोजित हुई कार्यशालाओं में SAGES लाला लाजपत राय स्कूल, SAGES लाल बहादुर शास्त्री स्कूल, SAGES लिंगियाडीह शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राजेन्द्रनगर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और SAGES डॉ. भीमराव अंबेडकर स्कूल शामिल रहे। कार्यशालाओं में विशेष रूप से यह स्पष्ट किया गया कि मासिक धर्म पर जानकारी का अभाव लड़कियों की नियमित स्कूल उपस्थिति को प्रभावित करता है और यह अनुच्छेद 21A के अंतर्गत शिक्षा के अधिकार का प्रत्यक्ष उल्लंघन बनता है।
आरुग की सबसे निर्णायक और अलग पहचान वाली पहल यह रही कि लड़कों को भी सैनिटरी पैड दिए गए, जिसका उद्देश्य उन्हें केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि भाइयों, मित्रों और भविष्य के जिम्मेदार नागरिकों के रूप में तैयार करना था। यह पहल सुप्रीम कोर्ट की उस व्याख्या से मेल खाती है जिसमें कहा गया है कि समानता का अर्थ केवल समान व्यवहार नहीं, बल्कि संरचनात्मक बाधाओं को हटाना है।


कार्यशालाओं में यह भी रेखांकित किया गया कि खराब मासिक धर्म स्वच्छता संक्रमण, स्वास्थ्य जटिलताओं और सामाजिक बहिष्कार को जन्म देती है, जो संविधान के अनुच्छेद 47 यानी जनस्वास्थ्य राज्य का कर्तव्य के विपरीत है। बिलासपुर कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने प्रोजेक्ट आरुग की इस अनूठी पहल की सराहना की है।
प्रोजेक्ट आरुग की संस्थापक विनीता पटेल ने कहा कि मेरे भाई प्रकाश पटेल और मैंने इस पहल की शुरुआत इसलिए की, क्योंकि हमें लगा कि बदलाव कानून से नहीं, समझ से शुरू होता है। आज सुप्रीम कोर्ट ने जिस सोच को अधिकार का दर्जा दिया है, आरुग उसी पर पहले से काम कर रहा था।

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