Janjgir news : अजा वर्ग के लिए आरक्षित पामगढ़ विधानसभा सीट में ‘हाथ’ पर ‘हाथी’ भारी…

Janjgir news : जकांछ ने बागी को मैदान में उतार कांग्रेस प्रत्याशी की राह में बिछा दिए कांटे

Janjgir news : क्षेत्र में समुचित विकास नहीं होने से कांग्रेस को नहीं मिल रहा बेहतर जनसमर्थन

Janjgir news : जांजगीर-चांपा। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित जिले की एकमात्र पामगढ़ विधानसभा सीट में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ‘हाथ’ पर बहुजन समाज पार्टी का ‘हाथी’ भारी पड़ता नजर आ रहा है। यहां कांग्रेस प्रत्याशी को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए ऐंडी-चोंटी का जोर लगाना पड़ रहा है, फिर भी स्थिति उनके माकुल नहीं है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने यहां कांग्रेस के एक बागी नेता को अपने साथ मिलाने के बाद फिर उन्हें ही चुनावी मैदान में उतार कर कांग्रेस प्रत्याशी की राह में कांटे बिछा दिए हैं। वहीं जनचर्चा है कि वर्तमान में यहां बसपा समर्थित विधायक होने के चलते प्रदेश सरकार की ओर से समुचित विकास कार्य नहीं करवाए गए हैं, जिसके चलते भी कांग्रेस प्रत्याशी को क्षेत्र के मतदाताओं का बेहतर समर्थन नहीं मिल पा रहा है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के 90 विधानसभा सीटों में से 38 नंबर की पामगढ़ सीट जांजगीर-चांपा जिले में शामिल है, जो अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है। यहां कुल वोटरों की संख्या करीब दो लाख है। इनमें से एक लाख 38 हजार पुरूष और करीब 96 हजार मतदाता महिला है। वर्तमान में यहां से बहुजन समाज पार्टी की इंदु बंजारे विधायक है। राजनीतिक और जातिगत समीकरणों की बात करें तो विगत कुछ चुनावों में पामगढ़ विधानसभा की जनता ने किसी एक पार्टी पर विश्वास नहीं किया है। राज्य गठन के बाद से अब तक हुए विधानसभा चुनाव में यहां की जनता हर बार अपना विधायक बदल देती है। पार्टी के लिहाज से देखें तो इस सीट को बहुजन समाज पार्टी का गढ़ माना जाता है। अब तक के विधानसभा चुनाव में यहां बसपा से चार बार विधायक बने हैं, जबकि भाजपा और कांग्रेस को सिर्फ एक-एक बार मौका मिला है। यहां सबसे ज्यादा अनुसूचित जनजाति के मतदाता निवास करते हैं। कहा जाता है कि जिस पार्टी ने इस वर्ग को साध लिया, उसकी जीत तय है। बता दें कि वर्ष 2018 में त्रिकोणीय मुकाबला होने की वजह से यहां अनुसूचित जनजाति वर्ग के वोट तीन भागों में बंट गए थे। लिहाजा, यहां दूसरे समाज के वोटरों ने परिणाम तय किया था। परन्तु, इस बार स्थिति काफी बदली हुई नजर आ रही है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) द्वारा कांग्रेस के बागी नेता एवं पूर्व प्रत्याशी गोरेलाल बर्मन को इस बार अपनी पार्टी से इसी सीट से ही चुनाव मैदान में उतारे जाने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी शेषराज हरबंश की मुश्किलें बढ़ गई है क्योंकि, पिछली बार कांग्रेस पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ने वाले गोरेलाल बर्मन महज तीन हजार वोटों से ही बसपा प्रत्याशी से पराजित हुए थे। ऐसे में उन्हें इस बार फिर से कांग्रेस पार्टी द्वारा चुनाव मैदान में उतारे जाने की चर्चा थी मगर, कांग्रेस पार्टी ने ऐनवक्त पर उनकी जगह वर्ष 2013 में इस सीट से प्रत्याशी रहीं शेषराज हरबंश को पुनः प्रत्याशी घोषित कर दिया, जिसके कारण फिलहाल इस सीट पर कांग्रेस की स्थिति कुछ बेहतर नहीं दिख रही है। कुल मिलाकर कहा जाए तो इस उटापटक का पूरा लाभ बसपा प्रत्याशी एवं मौजूदा विधायक इंदु बंजारे को मिलता हुआ नजर आ रहा है। दूसरी ओर, भाजपा प्रत्याशी संतोष लहरे की चुनावी गतिविधियां बिल्कुल भी नजर नहीं आ रही हैं। हालांकि, भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि वे दिखावा के बजाय धरातल पर रहकर पार्टी प्रत्याशी को जीताने की दिशा में काम कर रहे हैं।

 
Janjgir news : तीन दशक में केवल एक बार जीती कांग्रेस

पामगढ़ विधानसभा, छत्तीसगढ़ की उन गिनी-चुनी सीटों में से है, जहां बसपा का दबदबा है। कभी कांग्रेस का गढ़ रहे पामगढ़ विधानसभा में बीते तीन दशक में कांग्रेस केवल एक बार ही चुनाव जीत पाई है, वहीं अब तक हुए चुनाव में मात्र एक बार ही भाजपा का विधायक चुना गया है। पामगढ़ विधानसभा के चुनावी इतिहास को देखा जाए तो वर्ष 1990 के पूर्व यह सीट कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। वर्ष 1990 में बसपा के दाऊराम रत्नाकर विधायक बने, उसके बाद दो बार और विधायक बनने में कामयाब रहे, इस तरह दाऊराम रत्नाकर क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे। वर्ष 2003 में कांग्रेस ने शिवरीनारायण मठ के महंत राजेश्री रामसुंदर दास को मैदान में उतारा और वे कांग्रेस को जीत दिलाने में सफल रहे, लेकिन उसके बाद से कांग्रेस को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह वर्ष 2013 में पहली बार इस सीट से भाजपा के अंबेश जांगड़े विजयी हुए, फिर वर्ष 2018 के चुनाव में बसपा की इंदु बंजारे ने इस सीट पर जीत दर्ज की।

Janjgir news : पामगढ़ विधानसभा सीट पर मुद्दों की कमी नहीं

मुद्दों की बात करें तो पामगढ़ विधानसभा सीट पर मुद्दों की कमी नहीं है। विगत कुछ वर्षों में यहां विकास के काम तो हुए हैं, लेकिन आज भी कई काम ऐसे हैं, जिसकी आस जनता कई सालों से कर रही है, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। जब हमने वहां के मतदाताओं से बात की तो सबने एक स्वर में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार, भ्रष्टाचार को अपनी समस्या बताई। स्थानीय लोगों ने कहा कि यहां अधिकारी राज हावी है और भ्रष्टाचार इतना है कि पांच रुपए के काम के लिए 10 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ते है। उन्होंने बताया कि अधिकारी यहां तक कह देते हैं कि ऊपर वालों को भी देखना पड़ता है।

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