Janjgir news : टिकट मिलने के बाद से अब तक कांग्रेस प्रत्याशी का विरोध जारी, विरोधियों को साधना हुआ मुश्किल…
Janjgir news : जांजगीर-चांपा। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित जिले की पामगढ़ विधानसभा सीट में स्थानीय और बाहरी का मुद्दा काफी गरमाया हुआ है, जिसका खामियाज़ा अब कांग्रेस की प्रत्याशी श्रीमती शेषराज हरबंश को भुगतना पड़ रहा है। टिकट मिलने के बाद से लेकर अब तक यहां कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती हरबंश का विरोध जारी है, जिसके कारण उन्हें अपने पक्ष में माहौल बनाने में काफी मशक्क़त करनी पड़ रही है। इसके बावजूद वे क्षेत्र के मतदाताओं को साधने में कामयाब नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में इसका पूरा लाभ प्रमुख विपक्षी दलों बसपा और भाजपा को मिलता हुआ नज़र आ रहा है।
Janjgir news : दरअसल, कांग्रेस नेत्री श्रीमती शेषराज हरबंश जब से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में पामगढ़ विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरी हैं, तभी से उनका पूरे क्षेत्र में जमकर विरोध हो रहा है। खास बात तो यह है कि उनका विरोध करने वालों में अधिकतर लोग कांग्रेसी ही हैं, जो शुरू से ही नहीं चाहते थे कि पामगढ़ विधानसभा से कांग्रेस की टिकट श्रीमती शेषराज हरबंश को मिले परन्तु, तमाम विरोध के बावजूद पार्टी हाइकमान ने उन्हे ही चुनाव मैदान में उतार कर यहाँ बसपा समर्थित मौजूदा विधायक श्रीमती इंदु बंजारे को वॉकओवर दे दिया है, ऐसा पामगढ़ क्षेत्र के राजनीतिकारों का मानना है। दूसरी ओर, कांग्रेस के बागी नेता एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रत्याशी गोरेलाल बर्मन भी कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती हरबंश को पराजित करवाने के लिए पूरी तरह से कमर कसे हुए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, कांग्रेस से दावेदारी करने वाले कई अन्य नेता भी नहीं चाहते हैं कि श्रीमती हरबंश पामगढ़ सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच पाए। गौरतलब है कि जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र बसपा का गढ़ माना जाता है। इसमें जांजगीर-चांपा जिले की पामगढ़ और सक्ती जिले की जैजैपुर विधानसभा सीट फिलहाल बसपा के कब्जे में है और पिछले कई सालों से काफी मजबूत स्थिति में है। यही कारण है कि पामगढ़ में बसपा ही बेस्ट मानी जा रही है और इसका कारण यहां के चुनावी आंकड़े हैं। बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से यहां कुल चार बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इन चुनावों में दो बार बसपा ने जीत दर्ज की है तो कांग्रेस और भाजपा के हिस्से एक-एक जीत आई है। हालांकि, राज्य गठन के पहले बसपा पर कांग्रेस भारी रही और आठ में से पांच विधानसभा चुनाव कांग्रेस और तीन बसपा ने जीता। पामगढ़ में सबसे बुरी स्थिति भाजपा की रही है। भाजपा को इस सीट से अब तक केवल एक बार जीत मिली है। ऐसे में भाजपा इस बार पूरी रणनीति के साथ यहाँ से चुनाव लड़ रही है जबकि, बसपा अपने परम्परागत तरीके से मतदाताओं को साधने में जुटी हुई है। वहीं इनके इतर, कांग्रेस प्रत्याशी को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए कड़ी मशक्क़त करनी पड़ रही है।
वर्ष 1985 तक लगातार चुनाव जीती कांग्रेस
Janjgir news : पामगढ़ विधानसभा सीट का गठन साल 1962 के परिसीमन के बाद 1967 में हुआ। इसी साल यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ। पहले चुनाव में कांग्रेस ने महावीर को प्रत्याशी बनाया। जबकि, भारतीय जनसंघ की ओर से नेतराम चुनावी मैदान में उतरे। इस समय पामगढ़ विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 71 हजार 887 थी और इनमें से 19 हजार 837 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जब परिणाम घोषित हुए तो कांग्रेस को 12 हजार 202 वोट मिले, वहीं बीजेएस को 5 हजार 616 वोट। इस तरह 6 हजार 586 मतों से जीतकर कांग्रेस के महावीर इस क्षेत्र के पहले विधायक चुने गए। इसके बाद 1972, 1977, 1980 और 1985 के चुनाव में भी कांग्रेस की जीत हुई। इस दौरान शिवप्रसाद शर्मा लगातार तीन बार विधायक रहे।
तीन बार विधायक चुने गए बसपा के दाऊराम
Janjgir news : पामगढ़ में 1990 में हुए चुनाव में बसपा की एंट्री हुई। इस चुनाव में दाऊराम रत्नाकर बसपा की टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे और महज 341 वोट के अंतर से जनता दल के आनंद मिश्रा को हराकर बसपा को पहली जीत दिलाई। इसके बाद उन्होंने 1993 के चुनाव में भाजपा के बिसुन लाल को 8 हजार 91 वोट के अंतर से और 1998 के चुनाव में भाजपा की शकुंतला सिंह को सिर्फ 86 वोट से हराकर तीसरी बार जीत दर्ज की। छत्तीसगढ़ गठन के बाद साल 2003 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस के राजेश्री महंत रामसुंदर दास ने उन्हें 6 हजार 734 वोट के अंतर से हराया। इस तरह दाऊराम रत्नाकर की जीत का सिलसिला थम गया।
भाजपा को 2013 में मिली पहली और एकमात्र जीत
Janjgir news : पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में वैसे तो भाजपा ने पहला चुनाव 1985 में लड़ा, लेकिन इसके बाद भी उसे पहली जीत के लिए 2013 का इंतजार करना पड़ा। साल 2013 में भाजपा को पहली और अब तक की एकमात्र जीत मिली। इस साल हुए चुनाव में भाजपा के अम्बेश जांगड़े यहाँ बसपा के दूजराम बौद्ध को 8 हजार 125 वोट के अंतर से हराकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि, इसके पहले 1998 में भाजपा प्रत्याशी शकुंतला सिंह जीत के काफी करीब रहीं और उन्हेें महज 86 वोट के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।
2018 के चुनाव में तीसरे नंबर पर पहुंच गई भाजपा
Janjgir news : साल 2018 के विधानसभा चुनाव में पांच साल पहले चुनाव जीतकर विधायक बनने वाले अम्बेश तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में लड़ाई बसपा, कांग्रेस और भाजपा के बीच रही। इन्हें मिलाकर कुल 14 प्रत्याशी पामगढ़ विधानसभा में किस्मत आजमाने उतरे थे, लेकिन इनमें से 11 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई और केवल तीन ही अपनी साख बचा पाए। इसमें पहले पायदान पर बसपा की इंदु बंजारे रहीं। उन्हें इस चुनाव में 50 हजार 129 वोट मिले। दूसरे स्थान पर कांग्रेस के गोरे लाल बर्मन रहे, जिन्हें 47 हजार 68 वोट मिले थे। इसी तरह 32 हजार 676 वोट के साथ भाजपा के अम्बेश जांगड़े तीसरे पायदान पर रहे। यह चुनाव बसपा की इंदु बंजारे ने 3 हजार 61 वोट से अपने नाम किया।



